Hindi Poems · चारोळ्या

अपना तो हर लब्ज मानो गलत

अपना तो हर लब्ज मानो गलत,
और आसू भी जैसे सब झुठे है….

जरूरत के समय,
अपने भी हमसे अब रुठे है….

– अमर ढेंबरे